भारत में सभी पहाड़ी राज्य निम्नलिखित हैं:
उत्तराखंड
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
सिक्किम
पहाड़ी शब्द के अर्थ होते हैं उन लोगों का जो पहाड़ी क्षेत्र में निवास करते हैं। भारत में पहाड़ी क्षेत्र कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, देवभूमि एवं सिक्किम जैसे प्रदेशों में स्थित होते हैं। इसलिए, पहाड़ी शब्द का उपयोग उन लोगों के बारे में करने के लिए किया जाता है जो इन प्रदेशों में रहते हैं।
उत्तराखंड में पलायन एक बड़ी समस्या है। यहां कई लोग ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में जा रहे हैं या अन्य राज्यों में नौकरी के लिए चले जा रहे हैं। यह समस्या खासकर उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक है, जहां लोग अक्सर अपने घरों को छोड़कर अन्य राज्यों या शहरी क्षेत्रों में जाते हैं।
इस समस्या के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं, जिनमें से कुछ हैं:
रोजगार की कमी - उत्तराखंड में रोजगार की कमी है और यह लोगों को दूसरे राज्यों या शहरी क्षेत्रों में नौकरी ढूंढने के लिए मजबूर करती है।
बेरोजगारी - उत्तराखंड में बेरोजगारी की समस्या भी है, जो लोगों को उचित रोजगार के अभाव में दूसरे राज्यों या शहरी क्षेत्रों में जाने के लिए मजबूर करती है।
शिक्षा की अभावता - उत्तराखंड के कुछ इलाकों में शिक्षा की समस्या है जो लोगों को दूसरे राज्यों या शहरी क्षेत्रों में शिक्षा के लिए जाने के लिए
आप भी अपने सुजाव दे तकी हम में मुद्दों को सरकार तक पहुंचा सके#uttarakhand#india#pahadi#palayan#education
यहां एक पहाड़ी व्यंजन है जिसे आप बना सकते हैं:यहां एक पहाड़ी व्यंजन है जिसे आप बना सकते हैं:
बांगु की चट्टान (Baingu ki Chattan)
सामग्री:
500 ग्राम बांगु का आटा (जौ का आटा भी उपयोग किया जा सकता है)
1 छोटा चम्मच अजवाइन
1 छोटा चम्मच नमक
तेल (फ्राई करने के लिए)
विधि:
एक बड़ी कटोरी में बांगु का आटा, अजवाइन और नमक मिलाएं।
थोड़ा-थोड़ा करके पानी मिलाकर गाढ़ा आटा गूंथें।
आटा को चौथाई घंटे तक ढक कर रखें।
एक तलवार या चाकू की मदद से आटे को बारीक लंबवत फ़िलें।
एक भारी तलवार या बलवा मदद से फिर से फ़िलें ताकि चट्टान की तरह दिखाई दें।
एक कड़ाही में तेल गरम करें।
तले हुए बांगु की चट्टान को निकालकर विराट आकार में काट लें।
तले हुए चट्टान को नापकर तैयार रखें।
गरमा गरम बांगु की चट्टान का स्वाद लें!
यह भोजन सभी उपभोक्ताओं को पसंद आता है और इसे खाने से पहले जमीनी जश्न का आयोज
सामग्री:
500 ग्राम बांगु का आटा (जौ का आटा भी उपयोग किया जा सकता है)
1 छोटा चम्मच अजवाइन
1 छोटा चम्मच नमक
तेल (फ्राई करने के लिए)
विधि:
एक बड़ी कटोरी में बांगु का आटा, अजवाइन और नमक मिलाएं।
थोड़ा-थोड़ा करके पानी मिलाकर गाढ़ा आटा गूंथें।
आटा को चौथाई घंटे तक ढक कर रखें।
एक तलवार या चाकू की मदद से आटे को बारीक लंबवत फ़िलें।
एक भारी तलवार या बलवा मदद से फिर से फ़िलें ताकि चट्टान की तरह दिखाई दें।
एक कड़ाही में तेल गरम करें।
तले हुए बांगु की चट्टान को निकालकर विराट आकार में काट लें।
तले हुए चट्टान को नापकर तैयार रखें।
गरमा गरम बांगु की चट्टान का स्वाद लें!
यह भोजन सभी उपभोक्ताओं को पसंद आता है और इसे खाने से पहले जमीनी जश्न का आयोज
Pahadi culture refers to the cultural traditions and practices of the people living in the mountainous regions of northern India, primarily in the Himalayan states of Uttarakhand, Himachal Pradesh, and Jammu and Kashmir. The culture is influenced by the geography, climate, and lifestyle of the region and has been shaped over centuries by the diverse ethnic and linguistic groups that inhabit the area.
Pahadi culture is known for its rich music and dance traditions, which include the popular folk dances of Garba, Bhangra, and Nati. The music often features traditional instruments like the dhol, damru, and bansuri.
The region is also known for its handicrafts, such as weaving, embroidery, and woodcarving, which are often inspired by the natural beauty of the mountains. The cuisine of the region is characterized by its simplicity and use of locally sourced ingredients such as lentils, rice, and seasonal vegetables.
Pahadi culture is deeply rooted in spirituality and religion, with many festivals and traditions dedicated to various deities and beliefs. The region is home to several pilgrimage sites, including the holy shrines of Kedarnath, Badrinath, and Amarnath.